हरिवंश राय बच्चन ने अपने पूरे जीवन में कभी शराब को हाथ नहीं लगाया मगर ताज्जुब होता है कि कैसे मधुशाला जैसी कृति मे
जीवन की आपा-धापी में,
दौड़ भाग कर थक गए अब तो,
ं उन्होंने मधुशाला को जीवन के हर एक पहलू से जोड़कर हिंदी साहित्य के इतिहास को एक खुमारी से रूबरू कर दिया,
शराब मेरे लिए भी अभी तक उतनी ही अनजान वस्तु है, जितनी उनके लिए जीवन भर रही,
अंतर सिर्फ कृति कि महानता का है,
वो एक इतिहास बना
और ये दोस्तों के साथ के पल के यादों का दूर से देखा चित्रण...
शराब मेरे लिए भी अभी तक उतनी ही अनजान वस्तु है, जितनी उनके लिए जीवन भर रही,
अंतर सिर्फ कृति कि महानता का है,
वो एक इतिहास बना
और ये दोस्तों के साथ के पल के यादों का दूर से देखा चित्रण...
जीवन की आपा-धापी में,
लम्हों के कतरे-कतरे में,
छोटी सी खुशियों के पल में,
बहुत रहे थे खुश हम,फिर भी
क्यूँ छाई बेचैनी ऐसी,
जैसे लगा,समय जो पाया,
उसमे भी कुछ खोते खोते,
और कुछ पाते सपनों जैसे,
अब उनसे कुछ वक़्त चुराकर,
एक नयी ज़िन्दगी जीते हैं,
चलो आज 'दारु ' पीते हैं.
वो सफ़ेद चादर सपनों की,
जिसके भीनेपन से होकर,
हमें चाँद तारे दिखते थे,
उन पर जाने के वो फैसले,
नए नए सपने देते थे,
पर अब धुंधलाई है छाई,
जैसे मेरी ही परछाईं,
पीछा क्यूँ करती है मेरा,
आखिर मेरे भी वजूद का
कहीं तो होगा एक बसेरा,
वो सपनों की चादर फट गयी,
उसे नशे में ही सीते हैं
चलो आज "दारु" पीते हैं.
प्यार मोहब्बत अफ़साने हैं,
झूठे ये ताने -बाने हैं,
एक मरीचिका से भ्रमवाहक
दुःख दर्दो के तराने हैं,
इंतज़ार के वो लम्बे पल
कट गए जाने कब ज़िन्दगी में,
बचे पलों में मै कहता हूँ,
झुका था बस तेरी बंदगी में,
कटे पलों का दर्द मिटाने,
चल कुछ पल ऐसे जीते हैं,
चलो ना यार,
आज दारु पीते हैं........
kafi achchi rachna hai...
ReplyDelete@kissmiss
ReplyDeleteThnks fr ur cmpliment
Ye Title kaha se suja......Bada cool nd funny hai.....
ReplyDeleteBaki Poem to mast hai....
@mohit,
ReplyDeletebhai bas ek dost ke msg se....