आज (6 मई ) की सुबह कुछ अजीब थी. मै आठ बजे सोकर उठा था ,और वो भी तब जब कॉलेज जाने की कोई जल्दी नहीं थी. ये खुद अपने आप में अजीब था,मेरे लिए. बिस्तर पर लेटे-लेटे जब आराम को भी पूरा आराम मिल गया तो मै उठा,बेड के नीचे से चप्पल खिसकाकर पहनी,और कमरे से बाहर निकला. मेरे कमरे वाली गली सुनसान थी,एक अजीब सी शांति थी वहां,जैसे बिछड जाने की व्यथा के बाद मन सिर्फ सुनता है,एक खामोशी. कुछ वैसा ही मंजर था वहां. ये गलियाँ ऐसी तो कभी नहीं रहीं, सुबह से ही चहल कदमी शुरू हो जाती,कोई भगवान् प्रेमी नहा-धोकर पूजा-पाठ करने लगता,कोई किसी की मौज ले रहा होता,कभी रात के हैंगओवर की बातें,तो कभी किसी की माँ-बहन सम्बन्धी आपत्तिजनक शब्दों को बिना किसी आपत्ति के प्रयोग करना,एक क्रम सा बन गया था जैसे. इसी शोर की आदत हो गयी थी,पर आज यहाँ इतनी शांति ,जैसे शून्यता अपने चरम पर आकर और भी ऊपर जाना चाहती है.
इस शांति में भी एक शोर है जो मुझे विचलित कर देता है. उन सबसे बिछड जाने का जो मेरे बड़े भाई की तरह थे,अच्छे दोस्त की तरह,एक सच्चे साथी की तरह,वों मेरे सीनिअर्स थे. बीते पलों में जाता हूँ तो लगता है जैसे अभी कुछ दिन पहले की ही तो बात है. कैम्पस प्लेसमेंट की भागादौड़ी,फिर नौकरी लगने की खुशी,पार्टी,रात-रात भर जागकर पीना,फिर अपनी वाली का नाम बताकर इमोशनल हो जाना,साथ में बैठकर हँसना-रोना,GATE के लिए जी-जान से मेहनत करना,सब जैसे अभी की बात है. कुछ लम्हों में मै साथ था उनके और कुछ में नहीं,पर तटस्थ रहकर इनको देखना भी एक सुकून था,जैसे मै खुद उसे जी रहा हूँ. इन्ही लोगों के साथ रात में सिद्धार्थ जाकर चाय पीना,ताश खेलकर रात गुजारना,कभी-कभी रात में भूतों की बात करके डरवा देना,पेपर के पहले भी बेफिक्री से जीने की आदत,मैंने जैसे एक नया संसार देखकर उसमे जीने की आदत डाल ली थी.
पर आज फिर वही एकाकीपन छा गया है, जेब में पैसे हैं,पर सिद्दार्थ जाने का साथ नहीं है,डर ख़तम है,पर भूतों की बात करने वाला कोई नहीं,गाने हैं,स्पीकर है,पर उन पर डांस करके थिरकने वाला कोई नहीं,ताश की नयी गड्डी है,पर खेलने वालों का साथ चला गया. आप सब जा चुके हैं. इनके खाली कमरों में जाता हूँ तो वही हंसी,वही मस्ती,वही पार्टी याद आती है जो किसी कोने में बैठकर इन्जॉय की थी. यादों से जुड़े इन्ही एक कमरों में मै अपना आगे का सफ़र तय करूँगा,इससे जुडी हर एक याद को समेटे हुए.
आप सब अपना मुकाम पाएं,आगे बढे और एक बुनियाद कड़ी करें जिसपर बनी हर एक इमारत उतनी ही हसीं हो जितनी कभी आपकी कल्पनाओं में रही थी. आगे का सफ़र दोस्तों के साथ एक सीनिअर बनकर,बिना किसी की मदद के तय करना है,ज़िन्दगी का सफर कभी रुकता नहीं
अब तो बस चलते जाना है,
चलते जाना है..............
THAT WAS REALLY REAlly awesome......
ReplyDeleteseriously speaking when i was reading,i went back in the past n was living those moments once again.... thanx a lot bhai......
hmm nyc....this z sumthing which every one of us would find close to our heart....
ReplyDeleteThanks ma'am,
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